कला पृष्ठजाहि दिन हम मरब
हमर समाज बाजार मे रहत ओ घनिष्ठ मित्र लोकनि स्तब्ध भ’ जेताह हमर परिवार नष्ट भ’ जायत जाहि दिन हम मरब हमर टांग आराम करत आँखि देखब छोड़ि देत कान सुनब छोड़ि देत मुँहसँ सम्बोधन जाहि दिन हम मरब कियो हरियर बाँस काटि लेत। कियो छूरी कीनय जा रहल अछि ओहि आगि मे कतेको लोक जमा हेताह जाहि दिन हम मरब देह मे साँस नह
२ वर्ष अगाडि · कला पृष्ठ










