कला पृष्ठबर्षात--------
नाचैत ए धरती, मेंघक गर्जनसँ धून, छन-छन करैत बरसात, झुमि उठल आसमान आर तिनु लोकक संगहि बसात।। --------- बर्षा मे हरियाइत धरती सुखा पड़ल छल अखार, ब र'ख धरि सँ पियासली धरती, कयने छली इन्तजार।। ------------------------ अहिंक संग पिबने रहि कहियो हम बरसात में, बरखो बितल मुदा उतरल नहि नशा कुनो राति में।। ---
८ वर्ष अगाडि · कला पृष्ठ

