'अपन नेपाल' - कविता
नेपाल नेपाल नेपाल, अपन सुन्दर देश नेपाल ,अपन सुन्दर देश नेपाल छै । भारत चिनक बिचमे , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२। देख मनोरम प्राकृतिके तराइ पहाड हिमाल छै। पुर्वज के ईतिहास मे शासन केने गोपाल छै । अपन सुन्दर देश नेपाल , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२। जीव क नाथ पशुपतिनाथ साक्षात शिव भगवान छै। शान्ति संदेश ज
२०८० असोज १३ शनिबार, बेलुकी ५:५६ बजे२ मिनेट पढाइ

नेपाल नेपाल नेपाल, अपन सुन्दर देश नेपाल ,अपन सुन्दर देश नेपाल छै ।
भारत चिनक बिचमे , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२।
देख मनोरम प्राकृतिके तराइ पहाड हिमाल छै।
पुर्वज के ईतिहास मे शासन केने गोपाल छै ।
अपन सुन्दर देश नेपाल , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२।
जीव क नाथ पशुपतिनाथ साक्षात शिव भगवान छै।
शान्ति संदेश जगत परोसल गौतम बुद्ध महान छै।
जगत जननी सीता मैयाके नइहर ,अहि धर्ती पर मिथला धाम छै।
मिहिनेत के उपर करे भरोसा , यी देशक अपन किसान छै-२।
नेपाल नेपाल नेपाल , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२ ।
मेची स माहाकाली तराइ स लक हिमाली,नेपालक अपन सिमान छै।
बहादुर वीर स दुनियाँ जानै गोरखा अपन जवान छै ।
गणतन्त्र के फुल फुलल छै, साझा अपन संविधान छै।
अन्न फल भोजन अहि धर्ती पर, अपन माटी कृषिप्रधान छै। नेपाल नेपाल नेपाल अपन सुन्दर देश नेपाल छै -२ ।
प्राकृतिक सम्पति के भरल खजाना बहुमुल्य रत्न के खानी छै।
निर्मल जलके धनी नेपाल हिम नदिके पानी छै ।
विविधता मे एकता नेपाली सभक संदेश छै।
तरल राजनिती के कारण स युवा अपन विदेश छै।
नेपाल नेपाल नेपाल ,अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२।
बाघ बघेरा चितुवा शेरा वनजंगल मे करे बसेरा ।
खुल्ला सिमाना नै कोनो घेरा, ताहिक बिच नेपालीक डेरा-२।
ककरो पहिरन धोती कुर्ता छै, ककरो पहिरन दाउरा सुरुवाल।
ककरो माथ गम्छा पगरी छै, ककरो माथ टोपी रुमाल-२ ।
नेपाल नेपाल नेपाल , अपन सुन्दर देश नेपाल छै-२।
धन सम्पत्ति स भण्डार भरल छै , तैयो कहै गरिब छै ,
नेपाल गरिब नै छै, नेपाल अमिर छै -२।
नेपाल मे कि नै छै , नेपाल मे सब कुछ छै-२ ।
नेपाल नेपाल नेपाल, अपन सुन्दर देश नेपाल -२ ।
लेखक: राज कुमार साफी
विष्णुपुर गाउँपालिका–०४, थल्हा
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लेखक
राज कुमार साफी
न्यूज ब्यूरो, संवाददाता















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