मैथिली भाषा कामकाजी भाषाक आवश्यकता आ प्रयास
"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी" अर्थात :- जननी (माता) आओर जैठाम जनम भेल (जन्मभूमि ) सेठाम के स्वर्गो सँ श्रेष्ठ, उच्च आ महान मानल गेल छथि जे वेद पुराण आ धर्मग्रंथ मे दूनु के स्नेह ,ममता ,वात्सल्य, सम्बंधक पेटारी भरल बखान अतुलनीय कयल गेल ऐछ । अतह जीनका सभके अपन मातृभूमि, जन्मभूमि,आ मातृभाषा सँ प

२०७४ माघ १४ आइतबार, राति १०:४१ बजे५ मिनेट पढाइ

"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी" अर्थात :- जननी (माता) आओर जैठाम जनम भेल (जन्मभूमि ) सेठाम के स्वर्गो सँ श्रेष्ठ, उच्च आ महान मानल गेल छथि जे वेद पुराण आ धर्मग्रंथ मे दूनु के स्नेह ,ममता ,वात्सल्य, सम्बंधक पेटारी भरल बखान अतुलनीय कयल गेल ऐछ ।
अतह जीनका सभके अपन मातृभूमि, जन्मभूमि,आ मातृभाषा सँ प्रेम नै छैथ हुनका सभ मे मानवीय सम्वेदना कदापि नहि भ'सकैइए । जन्मभूमि, हमर जननी हमरा लेल पूजनीय ऐछ, वन्दनीय ऐछ आ जन्मभूमिक रक्षाक आर सम्मान के लेल हम सदिखन तत्पर खार रहैत छियैक आ रहक चाहि। अइ पर दूपाइँत याद एल ।
" जीनका तन मे मातृभूमिक भावना के बैरसत बर्षात नइँ, ओ सिलौट'क पाथर हैत, हृदय मे स्वदेश प्रेमक आँत नइँ ।। ---- बात एतह इ छय कि नेपाल सरकार तराईवासी के सकभर कुनो चिज सँ बंचित नहि कयने छई सरकार सदिखन तराई (हाल मधेश) मे बहुत रासँ जन मानस के शिक्षित आ होनहाँर बनाबय लेल बिदेशी आ स्वदेशी बजेटक सही उपयोग कयने छय जे हमरा एखनो निक जकाँ याद ऐछ। तराई मे बहुत पुर्व सँ शिक्षा के कमि कमजोरी सँ जनजाति के संबर्धन, उत्थानक लेल बाल-बच्चा सभक लेल गाँम-गाम मे इस्कूल जेकरा बालन कल्व के नाम सँ जानल जायत ऐछ सेहो प्रदान कयने छय जहि सँ बौआ बुच्ची सब आगु इस्कूल जाइके एकटा उच्चतम काज सेहो कयने ऐछ।
मुदा अतेक सहयोग कइयो कऽ सरकार एखनो लोकक नजैर मे दोषीऐ छैक। तराई (मधेश) मे युवा सभ बहुत रासँ कथा, कविता एवं नाटक के एकटा मार्ग बना कऽ जन चेतना जगाबै मे कुनो तरहक कमी नहि कयलाक जनता में शिक्षा प्रति रूचि बढ़ाव् में योगदान कयलक आ क रहल ऐछ।
उपरांतो तथाकथित मधेशी वुद्धिजीवी सभ जनमानस के गुमराह करए सँ कुनो तरहक के बाट नहि छोरने छथि ..!! सदिखन दोष सरकारक माथ थोपयत रहलैथ!!? आ सचाई के दबाबैत रहलईए वैह बुद्धिजीवी लोक। जे सरकार द्वारा देलगेल बजेट तराई के विकास के लेल पैसा व्यक्तिगत चबा गेल वैह लोक छियैक जे आई औंरी देखा रहलईए..!!
जनता के नाला, खधिया मे धकेलैत रहलईए वैह लोक आई भिन्न-भिन्न उपभ्रंश फैला कऽ जनता के चिकसा जेहन पिसैत जारहल ऐछ। मुदा कोई एकोटा आदमी तराई के गतिविधि, कमिकमजोरी सरकार धरि पहूँचाबई लेल प्रयत्न नहि कयलक? जहि सँ सरकार बुझैत की नेपालक धरोहर, बुझु आ प्रतिष्ठा एवं मान,मर्यादा जे छथि जनकपुरधाम ओहिठामक समस्या की छन्हि,,,,,,? सम्पूर्ण नेपाल आ तराई मिथिलावासीसँ एकटा छोट पश्न ऐछ तराई मधेश मे एखनो धरि करोड़पति लोक सब छथि बंगला गाड़ी सभ किछु छय आ वैह धनिक आ गरीव ओइठाम सरकार आबि कऽ राज केयलक की? तहन एकर जवाब किनको नइँ फुरायत।
जौं आई वैह सरकार धनिकहा के चंगुल सँ गरीब के बचाबै के प्रयास कयलक त इ भगेल गुलामी,,,, ? आहिरौबा ई त बड़ा बिचित्र बात भगेल जहि झिझिर'क बन्हन मुक्त कयलौ वेहिमे फेर बन्हाई जाय छी,,? बात आबईए मैथिली भाषा कामकाजी भाषा बनाओल जाय,,,!! आब पहिला प्रश्न छय कोन मैथिलि...!! ब्राम्हण आ कर्ण कायस्थक मैथिलि कि सम्पूर्ण मधेशी के बाज वला ठेठली.....??
एकटा होई छै मातृभाषा दोसर राष्ट्रभाषा प्रायः देशक प्रसाशनिक काम राष्ट्रिय भाषा होई छैक आब पडोसी भारत जेना रहित त बात अलग होयतैक। बिहार के मैथिलि भाषा भारत के संविधान के अष्टम सूचि में स्थान अगोटने छय मुदा बिहारक मिथिला काम काज लेल हिँदी प्रयोग होइछय आ भोजपुरी के त कोनो स्थान नै छय। खैर ई मथ दुःखी स अलगे रही। बहुत तरहक कारण स एखन नेपालक मधेश में समयानुसार मैथिली भाषा कामकाजी भाषा नहि बना सकैत अछि,,,!
बड़का बात त ई कि सम्पूर्ण प्रदेश नम्बर 2 में मात्र मैथिली भाषी छय ..?? जदि नै त ई बात स्पष्ट होना चाहि की मैथिलि बज वला कते % ठेठली बाज बाल कते % भोजपुरी मगही थारु राजवंशी बज वला कतेक % छय...??!! किएक त एखनो तराई मधेशवासी मे मैथिली भाषाक बहुत रासँ कमि कमजोरी भेलाक कारण एखन पुर्णतह उपयुक्त समय नइँ ऐछ। मैथिली भाषा कामकाजी भाषा बनाओल सँ पुर्व सरकार के तराई मधेशक बहुत रासँ जे खगता, बेगरता सब जे छथि हुनका पुर्ण करए पड़तैन्हि ।
जेना मैथिली ठेठली भाषाक उथान एवं संबर्धन आ जनमानस जे सभ मे मैथिली शुध्दिकरण हेबाक जरूरी ऐछ। हम मैथिलि ठेठली अहि दुआरे कहै छी जे किए किनको भाषा उधार ल क अपन जीभ मचोइड क अनसोहांते नमहर आदमी बन के प्रयास करु...!!
ताहि लेल अहि भाषा के प्रयोगात्मक लेल एकटा मैथिली ठेठली बिश्वविद्यालय तराई मधेश, मिथिला मे निर्माण के परम आवश्यकता ऐछ। अहि विश्वविद्यालय सं मैथिली भाषाक ठेठली भाषा पर् एम ए, बि एड , बि बि ए , डिप्लोमा इत्यादि पढ़ाई से साथ साथ मैथिली ठेठली शब्द कोश, व्याकरण, गूगल ट्रंसलेट एप अर्थात आवश्यकता अनुसार सम्पूर्ण शिक्षण प्रणाली विश्वविद्यालय मे होबाक जरूरी ऐछ । विश्वविद्यालय भेला सँ सम्पूर्ण मधेशी, पहाड़ी, हिमाली अपन ईच्छा अनूकूल पढ़ाई कऽ योग्यतानुसार नोकरी कऽ सकैइए ।
जहि सँ कुनो किसिमक भेदभाव नहि कऽ सकैत ऐछ। पुण: ध्यानाकर्षण करए चाहब सभ गोटेके जँ एखनै तत्कालीन यदि मैथिली भाषाक कामकाजी बनाओल गेल त' सिरहा धनुषा , सप्तरी ईत्यादि स्थान के जनमानस फेर शिक्षा आ नोकरी सँ बंचित रहि ज्यात।
आ अहि सँ फेर ब्राह्मणवाद के चंगुल मे सभ जनमानस फसिकऽ रहि ज्यात , किएक त मधेश मे मैथिली बिभिन्न प्रकार के बोलल जायत ऐछ आ देखल गेल अछि की एखन मात्र मैथिली ब्राह्मण सब बाजैत अछि। अंततः हम सरकार सँ विनम्र निवेदन करैत छियैक जे मैथिली भाषा के कामकाजी भाषा बनाओल सँ पुर्व सत्य,तथ्य, कमि कमजोरी,निक अधलाह के छानबीन कऽ अपन अमूल्य पग बढ़ाबई से अनुरोध करैत छियैक किएक त मधेसक ठेठली कोनो भी भाषा स बेसी साहित्यिक भावपूर्ण ममत्व मर्यादित ऐछ ।
--------------------- लेखक :- गुरु दयाल यदुवंशी, धिरेन्द्र पासवान सौर्य ।
हाल मलेसिया ।















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