"आजादी के लिए जंग आवश्यक"
आज तक कितने जर्नल-कर्नल, एस. पी., डी. एस. पी. का दिल शान्तिपूर्ण एवं अहिंसात्मक मार्ग से जीत पाएँ हैं? क्या राज्य संयन्त्र के हजारवाँ भाग के एक भाग फिरंगी लोग भी मधेशीयों के आवाज को सराहना देने लगे? कितने फिसदी लोग असहयोग आन्दोलन और सत्याग्रह के लिए तैयार हुए? सच तो यह हैं की स्वपन्न में जीना बेहद आ

२०७५ जेठ २४ बिहीबार, बिहान ९:०० बजे३ मिनेट पढाइ

आज तक कितने जर्नल-कर्नल, एस. पी., डी. एस. पी. का दिल शान्तिपूर्ण एवं
अहिंसात्मक मार्ग से जीत पाएँ हैं? क्या राज्य संयन्त्र के हजारवाँ भाग
के एक भाग फिरंगी लोग भी मधेशीयों के आवाज को सराहना देने लगे? कितने
फिसदी लोग असहयोग आन्दोलन और सत्याग्रह के लिए तैयार हुए?
सच तो यह हैं की स्वपन्न में जीना बेहद आनंदित होता हैं किंतु निंद खुल्ते हि अंधेरा हो जाती हैं | कार्य और उपलब्धियाँ हमेशा नापमान होने चाहिए न की सैद्धांतिक | लाखौं वर्षों से खाया जाता हैं की चोरी करना पाप हैं तो क्या चोरी खत्म हो गया? क्या उसे बचने हेतु बेड़िया की जरुरत नहीं पड़ती हैं? क्या लोगों को सिर्फ नेपाली उपनीवेश मधेशीयों के आत्मसम्मान एवं अस्तित्व के लिए खतरा हैं बताने से लोग सरकारी नौकरी छोड़ देंगे? अगर कुछ ने छोड़ भी दिया तो उनका क्या जो रात खाते हैं तो सुवह के लिए सोचते हैं?
इतिहास गवाह हैं की कथित अहिंसा प्रेमी प्रतिकूल वक्त में लोगों को
रिझाते हैं किंतु वक्त अनुकुल होते हि भाग खड़े होते हैं | भगवान के आज्ञा
की तरह इनके बात मानो तो सही किंतु अंजान में भी कुछ गलती हो गयी तो आप
अपरिचित हो | गांधी को हि देखिए की कैसे असहयोग आन्दोलन हेतु लोगों को
सरकारी नौकरी छुड़वाए, विदेशी कपड़ा जलाने को बोले किंतु आवेश और उत्तेजना
में कुछ लोगों ने एक थाने में आग क्या लगा दिए इन्होंने अपना आन्दोलन हि
वापस ले लिए |
उद्यमेन हि सिधंते कार्याणी न मनोरथै | अर्थात कार्य उद्यम से हि सिद्ध
होते हैं मनोरथ मात्र से नहीं | सोए हुए शेर के मुँह में हिरण प्रवेश
नहीं करते | आजादी हेतु संघर्ष एवं कुर्बानी की जरुरत हैं न की खोकले
भाषण एवं आदर्शवादी सोंच की | थोड़े देर की मनोरंजन के लिए ऐसा आदर्शवादी
सोंच भले हि अच्छा लगता हो किंतु इसके माध्यम से निकास नहीं मिलता ।
क्रांतिकारी के उपर हमेशा यह लाल्छना लगाते हैं की हिंसावादी लोगों से
दुर रहें | मैं पुछता हुँ हिंसा क्या हैं? अगर शस्त्र उठाना हि हिंसा हैं
तो मानवाधिकार के लोंग शस्त्र उत्पादों पर रोक लगाने की आवाज को बुलंद
क्यों नहीं करते? इराक पर तेल की लालच में आक्रमण करने वाले अमेरिका
बातचीत से क्यों नहीं रिझाते? हर एक मुल्क अपने आत्मरक्षा हेतु आधुनिक
हतियार बनाना क्यों बंद नहीं करते हैं?
हिंसा तो वह होते हैं जो दुसरो को प्रताड़ित करने हेतु शक्ति का इस्तेमाल
करें फिर चाहें वह सशस्त्र गतिविधि हो या ब्रेन-वाश तकनीकी हो | यह
आदर्शवादी सोंच कमजोरो को और कमजोर बनाने की ब्रह्मअस्त्र हैं | अपने
मात्रिभूमि एवं लोगों की स्वाधीनता के रक्षा हेतु शस्त्र उठाना आत्मरक्षा
हैं |
यह निःसंदेह मात्रिधर्म हैं और सैन्य धर्म भी | हम मधेश देश की
अघोषित सेना ने इसे अपना फर्ज समझ मात्रिभूमि के स्वतंत्रता हेतु हर कलंक
और लाल्छना को स्वीकार करते हुए अंतिम श्वास तक मधेश माँ की अस्मिता
बचाने हेतु लड़ेंगे |
हम आजाद हैं और आजाद हि रहेंगे | कोई फिरंगी या
आदर्शवादी व्यक्ति को बताने की जरुरत नहीं की हम भी सही हि कर रहें हैं
और मात्रिधर्म अदा कर रहें हैं | आशा हैं आने वाली पिढियां और इतिहास
हमारे साथ न्याय करेंगे |
जय मधेश जय क्रांति
कुमार भागीरथ, विदेह संयोजक-मधेशी क्रांतिकारी पार्टी
माथि लेखिएको आर्टिकल मात्र व्यक्ति विचार हो । न्यूज ब्यूरोले प्रकाशित गरेको छ ।















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