राजपा र समाजवादीले मधेशलाई ओलीको हातमा बेचे : डा. सिके राउत
तर, मधेश र मधेशी शहिदको नाममा राजनीति गर्ने यी पार्टी र पार्टीका अगुवा नेताहरुको कर्तुत त सबको सामुन्ने छ ।

२०७६ पुस २ बुधबार, राति ९:४६ बजे५ मिनेट पढाइ

न्यूज ब्यूरो, जनकपुरधाम । जनमत पार्टीका राष्ट्रिय अध्यक्ष डा. सिके राउतले राष्ट्रि जनता पार्टी नेपाल र संघीय समाजवादी पार्टी नेपालले पटक पटक मधेशलाई बेचेको आरोप लगाउनुभएको छ ।
आज (बुधबार) केपी ओली (सम्मानीय प्रधानमन्त्री समेत) र प्रचण्ड नेतृत्वको नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) सँग राजपाले हात मिलाएर मधेश र मधेशीको भावनासँग पुनः खेलवाड गरेको बताउनुभएको छ । नेकपा र राजपाबीच २ सिटको लागि गठबन्धन भएपछि राजपालाई औल्याउँदै डा. राउतले मधेशलाई पुनः नेकपाको अध्यक्ष केपी ओलीसँग बेचेको प्रतिक्रिया दिनुभएको हो ।
न्यूज ब्यूरोसँग कुराकानी गर्दै डा. राउतले आफ्नो पार्टी सरकारसँग सयौं साँसद, पत्रकार र लाखौं जनताको बीचमा विश्वभर टेलिभिजनबाट लाईभ गरेर नेपाल सरकारसँग सम्झौता गरेको बताउनुहुँदै राजपा र समाजवादी पार्टीले सरकारसँग नभएर पार्टीसँग सम्झौता गरी पटक पटक मधेशलाई बेचेको आरोप लगाउनुभयो ।
उहाँले भन्नुभयो, “मैले नेपाल सरकारसँग जनमत संग्रहको लागि सम्झौता गरेको छु, जो की पहिलेदेखि नै हामी माग्दै आएका छौं । जनमत संग्रहको बारेमा सम्मानीय प्रधानमन्त्रीकै अगाडी सम्झौता गरेको हुँ र त्यो कुरा अहिले पनि भिडियो रेकर्ड छ, हामीले यीनीहरु जस्तो बन्द कोठामा औठाछाप लगाएर सम्झौता गरेका होईनौ । मधेशका केही युवाहरुले हिरालाई ईट सम्झेर फालिरहेको देखिएको छ । तर, मधेश र मधेशी शहिदको नाममा राजनीति गर्ने यी पार्टी र पार्टीका अगुवा नेताहरुको कर्तुत त सबको सामुन्ने छ । मलाई केही भन्नुपर्दैन ।”
डा. राउतले राजपाको सम्झौतापछि आफ्नो अफिसियल फेसबुक पेजमा लेख्नुभएको छ :
आँख हैं तो मधेश को बार-बार बेचनेवाले, #ओली के हाथों बिकनेवाले #राजपा/ #फोरम (#समाजवादी) को देखो। वरना हीरा को ईंट सम्झकर मारते रहो। फोरम/समाजवादी और राजपा के लोग हमारे विषय में जनता में भ्रम छीटते रहे हैं। जबकि...
#१. स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन ने सर्वोच्च स्तर पर सम्झौता किया था। किसी भी देश में सर्वोच्च स्तर उसकी सरकार होती है। राजपा और फोरम/समाजवादी शासक वर्ग की पार्टी और व्यक्तियों के आगे नतमस्तक होकर सम्झौता करते रहे हैं, कभी ओली के साथ, कभी बाबुराम भट्टराई के साथ, कभी प्रचण्ड के साथ, तो कभी शेर बहादुर देउवा के साथ। प्रमाण देखें।
अभी भी, राजपा ने "#नेकपा" से सम्झौता किया है, एक पार्टी से सम्झौता करके मधेश को बेचा है।
#२. वह सम्झौता स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन और नेपाल सरकार के बीच समान स्तर पर था। नेपाल में इतना सम्मान देकर इस तरह से पहली बार ऐतिहासिक सम्झौता सार्वजनिक रुप में किया गया था। राजपा और फोरम/समाजवादी सिर्फ उनके दरबार में अंगुठा छाप लगवाकर आते रहे हैं। तस्वीर देखें। दरबार में कैसे हाजिरी लगा रहे हैं।
#३. समाजवादी पार्टी और राजपा के सम्झौता में एक ओर केपी शर्मा #ओली का #साइन है, एक ओर इनके #अध्यक्ष उपेन्द्र यादव , राजेन्द्र महतो की और दूसरे अध्यक्षों की। स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के सम्झौता में कोई माइका लाल दिखा दे #ओली का नाम और हस्ताक्षर ।
#४. फोरम/समाजवादी पार्टी और राजपा नेकपा से #गोप्य सम्झौता करता रहा है। अँधेरे कमरे में बैठकर सम्झौता किया। किसी को खबर तक नहीं। स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन ने पहले ही #घोषणा करके सारी #दुनियाँ को #दिखाकर, सारी दुनियाँ को #साक्षी रखकर सम्झौता किया। १० महिने से तैयारी करके किया था। सैकडौं सभासद्, पत्रकार और जनता सामने थी, और पूरा देश विदेश टिवी पर #लाइव रखकर देख रहे थे।
#५. हमारे में सम्झौता का मतलब वहीं समझाया गया था। यह हमारा विजय है वहीं प्रधानमंत्री से लेकर सभी के सामने कहा गया था। हमारी जनमतसंग्रह की मांग पूरी होने के लिए रास्ता खुला है कहके वहीं सम्झौता के वक्त ही सभी के सामने कहा गया था। फिर से सुन लें वह रेकर्डिंग, विडियो। समाजवादी पार्टी और राजपा के साथ के सम्झौता में बिलकुल अस्पष्टता रहती है। जनता की कोई मांग पूरी नहीं होती, बस कुर्सी मिलती है।
#६. स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन और नेपाल सरकार बिलकुल राजनैतिक सैद्धान्तिक सम्झौता है, कोई सत्ता का खेल नहीं, कोई सीट और पद का लेनादेना नहीं। विशुद्ध सैद्धान्तिक सम्झौता। गांधी-इरवीन के जैसा ऐतिहासिक सम्झौता।
जबकि फोरम/समाजवादी पार्टी और राजपा द्वारा किया गया हर सम्झौता सरकार में जाने के लिए, मन्त्री सांसद बनने के लिए है, कुर्सी के लिए है।
#७ और हाँ, कुछ और वर्ष इंतजार करें, तभी पता चल ही जायेगा कि राजपा और फोरम (समाजवादी) सिर्फ काँग्रेस एमाले के "बच्चे" थे, वहीं से पैदा हुये और उसी में समाहित हो गये। कांग्रेस में पद नहीं मिला, तो दूसरा बना लिये। देखा मधेश में लरंग पैदा हुआ, तो तमलोपा बना लिये। एमाले छोड माओवादी बने, माओवादी से फूटकर फोरम...तो अपने मातापिता की सेवा तो फोरम (समाजवादी) / राजपा करेंगे ही न ?
जनमत पार्टी ही मधेश में ऐसी पार्टी है जो विशुद्ध रुप से जनता की पार्टी है, जनता के बीच से उठी पार्टी है, संघर्ष से उठी पार्टी है।
आँख खोलकर देख लो...
हाँ, बात यही है कि हमारे पास कोई पत्रकार नहीं, कोई फुलटाइम कार्यकर्ता नहीं, जो आपको सच्चाई बता सकते, फेसबुक पर भी हमारे पक्ष में लिख सकते, समझा सकते। फर्क इतनी सी है ! जिससे "हीरा" जैसा ऐतिहासिक सम्झौता होते हुये भी, गंगा जैसे पवित्र सम्झौता होते हुये भी हमें बदनामी झेलनी पड़ी। परन्तु हम विश्वस्त हैं इतिहास में जब आजसे १०-१५ वर्ष बाद लोग सोचेंगे, तब अपने दाँतों तले अंगुली दबायेंगे।
तब तक हर परिस्थिति को झेलने हम स्वराजी तैयार हैं। जब सच्चाई अपने दिल में हो, तो दूसरों को पता चले न चले, अपने को तो पता होता ही है। ईश्वर सदैव साक्षी रहेगा।
जय मधेश, जय जनमत, जय स्वराज !

















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