भारत से सहायता की आश रखना मधेशीयों के लिए निरर्थक !
बहुत लोगों का यह धारणा आता रहता हैं की भारत तो मधेशीयों के लिए सोंचेंगे , वे तो मधेशीयों के लिए कुछ करेंगे , भारत स्वतंत्र मधेश के लिए क्यों कुछ नहीं बोलता हैं । इतिहास गवाह हैं की मधेशीयों ने भारत के लिए प्राण की दाँव लगाने से भी पिच्छे नहीं हटा हैं किन्तु हर काल खण्ड़ में भारत ने मधेशीयों के साथ धो

२०७५ साउन ८ मंगलबार, बिहान ९:०१ बजे३ मिनेट पढाइ

बहुत लोगों का यह धारणा आता रहता हैं की भारत तो मधेशीयों के लिए सोंचेंगे , वे तो मधेशीयों के लिए कुछ करेंगे , भारत स्वतंत्र मधेश के लिए क्यों कुछ नहीं बोलता हैं ।
इतिहास गवाह हैं की मधेशीयों ने भारत के लिए प्राण की दाँव लगाने से भी पिच्छे नहीं हटा हैं किन्तु हर काल खण्ड़ में भारत ने मधेशीयों के साथ धोखाधड़ी हि किया हैं ।
मधेशी राजा जनक ने अपनी पूत्री सिता जी को भारतीय राम को विश्वास के साथ अर्पित किया किन्तु उसी राम ने सिता जी को गर्भवती अवस्था में वनवाश भेंज दिया और बाद में लव-कुश पूत्र मिलने पर उन्हीं सिता जी से पवित्रता की प्रमाण माँग किया जब की तिनों लोक में उनकी पवित्रता और पतिव्रता की उदाहरण बना हुआ था |
राम ने केवल यह सब अपनी आत्मसम्मान और झूठे सान के लिए किया , किन्तु मधेशी अभी तक भी आत्मसम्मान के प्रवाह किए बगैर हि भारत को साथ देते आएँ हैं , क्या यह सोंचने की घड़ी नहीं हैंरु |
ठीक उसी तरह मधेशी राजा शाक्यान वंशी ने भारत के कोशल राजा प्रसेनजीत को मधेशी पूत्री के साथ विवाह करवाया किन्तु उसी प्रसेनजीत के पूत्र विरुद्धक ने शाक्यान और कोलीय वंश की विनाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ा | उन्हें यह भी याद नहीं रहा की इसि मधेशी पूत्री के कोख से उनका जन्म हुआ और उनही के दुध से वह पला बड़ा हुआ हैं | क्या यहीं हैं सखा संबंधि प्यार ।
भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी मधेशी ने खुल कर भारतीयों का साथ दिया | अपने हि भूमि पर सैन्य अभ्यास करवाया और बंदी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी को जेल मुक्त कराने प्राण की वाजी लगाते हुए हनुमान नगर, सप्तरी जेल को ध्वस्त कर उन्हें आजाद कराया किन्तु भारत ने मधेश नेपाल की भूमि हैं जैसे झूठ और घटिया अभिव्यक्ति से नेपाल को संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता दिलवाया जिसे नेपाल ने मधेश की भूमि हड़प लिया और मधेशी जनता अपने हि भूमि पर गुलामी करने पर मजबूर हो गए जब की भारत को भी भारत को पता था की यह भूमि अंग्रेजो नेपाल को एक संधि के मार्फत दिया था जो की संयुक्त राष्ट्र संघ की चार्टर के मुताबिक स्वतंत्र रहना चाहिए ।
ऐसे और भी बहुत धोखाधड़ी भारत ने मधेशीयों के साथ किया हैं जिस की गणना की जाए तो संभव नहीं हैं | इसिलिए भारत से सहायता की आश रखना और उस पर विश्वास करना निरर्थक हि नहीं अपितु मधेश और मधेशी के अस्तित्व के लिए खतरा भी हैं ।
मधेशी सदैव हि भारत के साथ मित्रवत व्यवहार रखेगी किन्तु एक तरफा प्यार अब किसि भी हाल में स्वीकार्य नहीं ।
अतः मधेशी जनता से अपील करते हैं की दुसरो के उपर नहीं खूद पर विश्वास रखते हुए मधेश स्वतंत्रता के लिए आगे बढ़े ्र खूद स्वतंत्र होने पर हि कोई मित्रवत व्यवहार करते हैं नहीं तो गुलाम के तरह लात हि मारते हैं ।
रामेश्वर प्रसाद सिंह [रमेश]
गोलबजार-13, सिरहा [मधेश]
कस्तो महसुस भयो ?
प्रतिक्रिया दिन साइन इन गर्नुहोस्
AI सारांश र अडियो स्वचालित रूपमा तयार गरिएको — सम्पादकीय निगरानीमा प्रकाशित।
















टिप्पणी
आफ्नो विचार राख्न साइन इन गर्नुहोस्।
लोड हुँदै…