विचार / ब्लगमिथिला परिक्रमा के पराक्रम से होली महोत्सब की और यात्रा ...
परापूर्व काल से मिथिलाञ्चल के भूमी ऋषी–मनीषी और साधु–सन्तो का तपस्थली होता आ रहा हैं । इसी पवित्र भूमी पर अष्टावक्र जैसा सांख्योगी, राजर्षी जनक जैसा कर्मयोगी पैदा हुऐ । जिसने अपने योग बल से अनेकौ बुद्ध पुरुष और बुद्धत्व के पिपासु जिज्ञासु को अपनी अन्र्तपथ पर चलने में मार्गदर्शन किया हैं । । राजर्षी
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